प्रोजेक्ट चीता ने एक और बड़ा कदम उठाया है। 7 अक्टूबर 2026 को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कूनो नेशनल पार्क से लाए गए दो चीतों को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व में छोड़ा। कूनो और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य के बाद अब यह राज्य का तीसरा चीता ठिकाना बन गया है।
कौन-से चीते गए?
- थोलो – नर
- CCB-3 – मादा
दोनों को कूनो से लाया गया है। रिज़र्व में लगभग 439 हेक्टेयर क्षेत्र खास तौर पर तैयार किया गया है, ताकि यह जोड़ा सुरक्षित रूप से नए माहौल में ढल सके। खबरों के अनुसार आगे दो और चीते यहाँ लाने की योजना है।
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व कहाँ है?
पहले इसे नौरादेही के नाम से जाना जाता था। यह रिज़र्व मध्य प्रदेश के सागर, दमोह और नरसिंहपुर ज़िलों में लगभग 2,339 वर्ग किलोमीटर में फैला है। सितंबर 2023 में इसे टाइगर रिज़र्व का दर्जा मिला। कूनो और गांधी सागर से अलग, यहाँ चीते बाघ और तेंदुओं के साथ एक ही जंगल में रहेंगे।
कूनो सफारी के लिए इसका क्या मतलब है?
कूनो अब भी भारत के चीतों का मुख्य घर है। भारत में 60 चीते हैं (5 अक्टूबर 2026 तक), जिनमें से 41 भारत में जन्मे हैं — और इनमें से ज़्यादातर कूनो में ही रहते हैं, KJP21 के पाँच नए शावकों समेत (यह खबर पढ़ें)।
कूनो सफारी का सीज़न 1 अक्टूबर से 30 जून तक खुला है। टिकटोली गेट से रोज़ सुबह 6:00 बजे और दोपहर 3:00 बजे सफारी होती है। चीता दिखने की गारंटी कभी नहीं दी जा सकती, लेकिन लोकल गाइड और सुबह की सफारी से आपके चांस सबसे अच्छे रहते हैं।
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स्रोत
कवर: प्रतीकात्मक फोटो, इस खबर वाले चीते नहीं — "Cheetah Brothers", Arturo de Frias Marques, CC BY-SA 4.0, Wikimedia Commons।
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